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Tuesday, April 23, 2024

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गांवों से जाति विशेष के पलायन से चरमरा रही शहरों की व्यवस्था: डॉ कृष्ण कुमार

गांवों से जाति विशेष के पलायन से चरमरा रही शहरों की व्यवस्था: डॉ कृष्ण कुमार
अमेरिका में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डीएवी गर्ल्स कालेज के प्राध्यापक ने किया शोधपत्र प्रस्तुत

यमुनानगर प्रदेश एजेण्डा न्यूज़

डीएवी गर्ल्स कालेज के मानवाधिकार विभाग के प्राध्यापक डॉ कृष्ण कुमार ने अमेरिका की ब्रेंडाइज यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया। डॉ कृष्ण कुमार ने शहरी मलिन बस्तियों में जाति और सामाजिक बहिष्कार विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस दौरान डॉ कृष्ण कुमार  ने चीफ जस्टिस डीवाई  चंद्रचुड सिंह से मुलाकात भी की। सम्मेलन  में विश्वभर  से 50 देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
डॉ कृष्ण कुमार ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की सामजिक व्यवस्था में दलितों स्थिति का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि किस प्रकार जाति, दलितों को समाज की मुख्य धारा से अलग कर देती है। जिसके कारण दलित गांव से शहरों में मलिन बस्तियों की तरफ पलायन कर रहे है। यह पलायन दलितों की समस्या न होकर भारत की समस्या बन गया है। बस्तियों में पानी, सफाई व्यवस्था की सही प्रकार न होने की वजह से लोग भयंकर बीमारियांे का शिकार हो रहे है। जिसमें हैजा, मलेरिया, डेंगू इत्यादि बीमारियां शामिल है। इससे शहरी अस्पतालों में व्यवस्था चरमरा जाती है।
भारत की जाति व्यवस्था भारतीय समाज को पश्चिमी समाज से भिन्न करती है। जाति केवल पहचान नहीं है, बल्कि जाति भारतीय समाज एक ऐसा गुण है, जो भारतीयों के समाजिक संबंधों का निर्धारण करती है। यह एक पीरामिड की तरह भारतीय समाज को प्रस्तुत करती है। जिसमें एक जाति को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, वहीं दूसरी जाति निम्न स्थान पर दर्शायी गई है। इस जाति विशेष के लोगों को आज भी भारत में पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई बार तो पानी को लेकर जाति विशेष के लोगों की हत्या तक कर दी जाती है। एनसीआरबी के आंकडों के मुताबिक प्रत्येक सप्ताह  जाति विशेष के 13 लोगों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। पांच घरों को आग के हवाले किया जा रहा है। छह लोगों का अपहरण तथा 21 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं हो रही है। जाति के कारण ही जाति विशेष के लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जाता रहा है। आईआईटी मुंबई के एक सर्वे के मुताबिक जाति के आधार की वजह से ही शिक्षण संस्थानों में भी जाति विशेष के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव किया जाता है। यही वजह है कि ऐसे विद्यार्थी आत्महत्या जैसा कदम उठाने पर भी मजबूर हो जाते है। वहीं दूसरी ओर वैश्वीकरण व तकनीकीकरण ने जाति के बंधनों को कमजोर भी किया है। आनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियां आज लोगों को खाना उपलब्ध करवा रही है। जिसमें जाति पूरी तरह से अदृश्य है।

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