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Saturday, June 22, 2024

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नायब सिंह सैनी को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बना, सीएम मनोहर लाल का बड़ा दांव 

नायब सिंह सैनी को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बना, सीएम मनोहर लाल का बड़ा दांव
अब जबकि चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है। प्रदेशाध्यक्ष के पद पर नायब सिंह सैनी की नियुक्ति सीएम मनोहर लाल का बड़ा दांव है। यह दांव सफल रहा तो बल्ले बल्ले, यदि कामयाब नहीं रहा तो आ सकती है भारी दिक्कत 
चंडीगढ़  प्रदेश एजेण्डा न्यूज़
भाजपा ही नहीं सीएम मनोहर लाल का भी यह बड़ा दांव है। प्रदेशाध्यक्ष पद पर नायब सिंह सैनी की नियुक्ति। लोकसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं है। सैनी और सीएम मनोहर लाल के पास वक्त नहीं है। उन्हें तेजी से काम करना होगा। वह वजह, जिन्हें आधार बना कर ओमप्रकाश धनखड़ को अध्यक्ष पद से हटाया। वह अभी भी जस की तस है। जानकार तर्क दे रहे हैं कि प्रदेश का ओबीसी वोटर्स भाजपा के साथ जुड़ेगा।
इस बारे में दयाल सिंह कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर रामजी लाल इसे मीडिया का शिगूफा भर करार देते हैं। उनका कहना है कि ओबीसी वोटर्स यूं ही किसी के साथ नहीं जुड़ता। डॉक्टर रामजी लाल कहते है कि ओबीसी ही क्यों, किसी भी समुदाय का वोटर्स सिर्फ इसलिए किसी पार्टी से नहीं जुड़ता कि उसकी जाति का नेता उच्च पद पर है। यह देखा जाता है कि उसने बिरादरी के लिए किया क्या?
भाजपा का यदि प्रदेश स्तरीय ढांचा भी हम देखे तो इसमें क्या सभी बिरादरी को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सीएम पंजाबी समुदाय है। लेकिन हम जिन्हें गैर जाट वोट कहते हैं, उनका भाजपा के ढांचे में कितना प्रतिनिधित्व है। यह देखने और समझने की जरूरत है।
तो क्या वह भाजपा के वोटर्स नहीं है। वह भी भाजपा को वोट देते हैं। इसलिए जाति और समुदाय के स्तर पर इस तरह से आकलन करना वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नहीं दर्शाता।
कास्ट फैक्टर की बातें मीडिया में उछाली जाती है। पढ़ने में भी अच्छी लगती है। क्योंकि एक लंबे समय से इस तरह से जातिगत राजनीति हो रही है। हमारा दिमाग इस तरह की बातों को जल्द ही स्वीकार कर लेता है। इस पर ज्यादा बहस भी नहीं होती। इसलिए इस तरह के तर्क दे दिए जाते हैं। सच यह है कि लंबे समय से ओबीसी इ उपेक्षित है। यह तथ्य उन्हें समझ में आ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बात को मजबूत किया है।
भाजपा इसकी काट खोज रही है। इसलिए ओबीसी समुदाय के नेता को प्रदेशाध्यक्ष बनाया। यह सिर्फ एक तर्क भर है। डॉक्टर रामजी लाल कहते हैं,इसकी और भी अनेक वजह है। पहली तो यह है कि मनोहर लाल अब खांटी राजनीति की भूमिका के लिए खुद को तैयार करना चाह रहे हैं। वह अपने लिए एक छवि गढ़ना चाहते हैं। यह तभी संभव होगा, जब उनके सामने उन्हें चैलेंज करने वाला कोई न हो।
वह इस बार के लोकसभा व विधानसभा चुनाव में एक रणनीतिकार के तौर पर खुद को आगे कर रहे हैं। नायब सिंह सैनी की नियुक्ति इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। हरियाणा की राजनीति को लंबे समय से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार रामपाल शर्मा कहते हैं कि ऐसा महसूस हो रहा है कि भाजपा अब जाट व नॉन जाट की राजनीति पर फोकस कर रही है।
रामपाल शर्मा ने बताया कि दूसरी बात यह है कि लग रहा कि जेजेपी के साथ ही भाजपा चुनाव में जाएगी। वोटों का जो गणित भाजपा के रणनीतिकार बना रहे हैं,इसमें जेजेपी को जाट वोटरों में पैठ बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।
ऐसा करते हुए भाजपा यह भूल रही है कि जेजेपी की जाट बेल्ट में आलोचना हो रही है। उनकी जाट वोटर्स से पकड़ कमजोर हुई है। पता नहीं क्यों भाजपा इस तथ्य को समझ पा रही है।
डॉक्टर लाल कहते हैं, भाजपा के रणनीतिकार यदि यह सोच रहे हैं कि उन्हें जाट वोटर्स की जरूरत ही नहीं है। यह उनका आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।इतनी जल्दी ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला कि नान जाट वोटर्स को भाजपा अपने साथ बहुत तेजी से जोड़ सके।
रामपाल शर्मा कहते हैं कि इसमें दो राय नहीं कि नायब सिंह सैनी और सीएम मनोहर लाल की आपसी समझ जबरदस्त है। सीएम मनोहर लाल प्रदेश के मतदाताओं का तेजी से अपने साथ जोड़ भी सकते हैं।
उतनी ही तेजी नायब सिंह सैनी को दिखानी होगी। उन्हें ओबीसी वोटर्स को अपने साथ जोड़ने के लिए मुद्दे तलाश करने होंगे।उनका विश्वास जीतने के लिए काम करना होगा। नायब सिंह सैनी के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है। रामपाल शर्मा कहते हैं कि एक तर्क दिया जा रहा है कि धनखड़ प्रदेशाध्यक्ष पद पर रहते हुए संगठन और सीएम के बीच दूरी पाट नहीं पाए। इस वजह से कार्यकर्ता नाराज है।
अब कार्यकर्ताओं को कैसे मनाया जाए? इस बारे में भी नायब सिंह सैनी को सोचना होगा। सबसे बड़ी बात तो यह है कि क्या वह प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर खुद को सीएम के बराबर रख सकते हैं, या फिर सीएम के यश मैन बन जाते हैं।
कुल मिला कर यह बड़ा दांव है, जो भाजपा, खासतौर पर सीएम मनोहर लाल ने खेला है। उन्होंने खुद को दांव पर लगा दिया है। अब देखना यह है कि यह दांव किस पासे पड़ता है।

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